शिवरात्रि पर दूध के नुकसान को रोकने के लिए मेरठ के युवाओं ने उठाया ये कदम।

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शिवरात्रि पर दूध के नुकसान को रोकने के लिए मेरठ के युवाओं ने उठाया ये कदम और सैकड़ों गरीबो को पिलाया।

जब करन गोयल के परिवार ने उन्हें शिवरात्रि पर शिव मंदिर में जाने के लिए कहा, तो 24 वर्षीय करन ने विरोध किया और कहा कि वह शिल्लिंग पर दूध बर्बाद करना पसंद नहीं करते, जो हम गरीबों को दे सकते है।

युवा ने इस बात को अपने चार दोस्तों के साथ चर्चा की और एक साथ उन्होंने एक ऐसी प्रणाली तैयार की जो दूध की किसी भी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाये बिना बर्बाद होने से रोके।

समूह ने मेरठ के बिलेश्वरनाथ मंदिर में पुजारी को शिवरात्रि में अवशर पर मंदिर के परिसर में व्यवस्था स्थापित करने के लिए आश्वस्त किया और छापे हुए पम्पलेटे भक्तों में बाट दिए। बुधवार को उन्होंने 100 लीटर दूध बचाया और इसे वंचित और अनाथ बच्चों को वितरित किया।

“निशांत सिंघल, अनमोल शर्मा, अंकित चौधरी, चिरचिट कंसाल और मैं मेरठ पब्लिक स्कूल से 2012 में पास हुए है। बाद में, हम में से कुछ स्नातक स्तर के लिए अलग-अलग शहरों में चले गए। हमने कई बार इस बात पर चर्चा की और अंत में इस शिवरात्रि पर इसे अंजाम देने का फैसला किया, “करण ने कहा

“भक्तों का दूध कलश पर डाल दिया जाता है जो कि शिवलिंग से ऊपर स्थित है हमने कलश में दो छेद बनाए – एक कलस के निचले हिस्से पर और एक निश्चित ऊंचाई पर कलश की सात लीटर की क्षमता थी। इसलिए हमने एक प्रणाली तैयार की जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि शिवलिंग पर एक लीटर दूध चले जाने के बाद शेष छह लीटर दूसरे छेद से जुड़े पाइप के माध्यम से एक कंटेनर में एकठा हो जाये। ”

उपकरण को स्टील ट्राइपॉड स्टैंड पर सेट किया गया था जो शिल्लिंग से जुड़ा है,

“हमने इस प्रणाली को विकसित करने के लिए केवल 2,500 रुपये खर्च किए। आईआईएमटी कॉलेज, मेरठ से बीसीए कर रहे निशांत सिंघल ने कहा, हम अपने फेसबुक पेज ‘इंडिया अगेंस्ट हंगर’ पर वीडियो अपलोड करेंगे, ताकि अन्य शहर के लोग देख सके और इसे दोहराया जा सके।

पहले परीक्षण के बाद, समूह ने पराग मिल्क फूड्स को दूध की गुड़वक्ता मापक मशीन से दूध की गुणवत्ता के बारे में बताया। “हमें बताया गया कि दूध को संदूषित नहीं करने का एकमात्र तरीका यह है कि वह स्टील के कंटेनरों में भंडारण करे और भक्तों को कलश पर केवल सादा दूध डालना है।

अक्सर, लोग फूलों की पंखुड़ियों और अन्य चीजों को दूध में डाल कर चढ़ाते हैं। पर्चे के माध्यम से, हम ऐसे लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे सीधे शिवलिंग पर दूध डाल दें। “मेरठ में भारत इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से ग्रेजुएशन कर रहे अनमोल शर्मा ने कहा।

मशीन का परीक्षण सोमवार और मंगलवार को साकेत शिव मंदिर में किया गया था। “हमें शिवरात्रि पर 50 लीटर दूध बचाने की उम्मीद थी हालांकि, हमारे आश्चर्य की बात है, हमने दोपहर तक 100 लीटर से अधिक बचत की। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी करने वाले चिरचिट कंसल ने कहा, “बचाया हुआ दूध सत्यकाम मानव सेवा समिति को भेजा गया जो अनाथ बच्चों और एचआईवी पॉजिटिव बच्चों को आश्रय प्रदान करता है।”

“हमने कलस मशीन मंदिर के अधिकारियों को सौंप दिया है हर सोमवार को जो दूध प्राप्त होगा उसे बच्चों को दे दिया जाएगा, “इंजीनियरिंग छात्र अंकित चौधरी ने कहा

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